समय और भावनात्मक दूरी
जब इंतज़ार लंबा होने लगे
वही समय किसी के लिए भागदौड़ हो सकता है और किसी के लिए इंतज़ार। इस अंश में साथ होने की चाह और समय के अनुभव के बीच की दूरी झलकती है।
फिर मिनट घंटों में बदलने लगे...
और धीरे-धीरे घंटे दिनों में।
Original book excerpt · आकाश की ज़मीनी उड़ान · Varun Gupta · Printed page 103
This is a short selected excerpt, not a complete chapter. Introductory commentary is by Veena Publishing.
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संघर्ष से अकेलेपन तक की कहानी।
Author: Varun Gupta · Veena Studios
ISBN 978-93-345-2567-0
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